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वर्तमान में ईस्ट इंडिया कंपनी कौन सा व्यापार कर रही है? वर्तमान में इसका कार्यक्षेत्र कहाँ तक है?

बहुत अच्छा प्रश्न किया है। सबसे पहले ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600ईस्वी में हुई थी। इसे यदाकदा जॉन कंपनी के नाम से भी जाना जाता था। इसे ब्रिटेन की महारानी ने भारत के साथ व्यापार करने के लिये 21 सालो तक की छूट दे दी। बाद में कम्पनी ने भारत के लगभग सभी क्षेत्रों पर अपना सैनिक तथा प्रशासनिक अधिपत्य जमा लिया। इसके संस्थापक जॉन वाट्स थे। एक दौर ऐसा भी था कि ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्ज़े में एशिया के तमाम देश थे. इस कंपनी के पास सिंगापुर और पेनांग जैसे बड़े बंदरगाह थे. ईस्ट इंडिया कंपनी ने ही मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों की बुनियाद रखी. ये ब्रिटेन में रोज़गार देने का सबसे बड़ा ज़रिया थी.



भारत में इस कंपनी के पास ढाई लाखलन्दन स्थित ईस्ट इण्डिया कम्पनी का मुख्यालय (थॉमस माल्टन द्वारा चित्रित, 1800 ई)
. ये सिर्फ़ इंग्लैंड ही नहीं, यूरोप के तमाम देशों के लोगों की ज़िंदगियों में दखल रखती थी. लोग चाय पीते थे तो ईस्ट इंडिया कंपनी की, और कपड़े पहनते थे तो ईस्ट इंडिया कंपनी के.
ज़रा ईस्ट इंडिया कंपनी की आज की गूगल या अमेज़न से तुलना करिए. साथ ही इनकी संपत्ति में टैक्स वसूलने की ताक़त जोड़िए. ये भी कि कंपनी के पास अपनी खुफिया एजेंसी थी और लाखों की फौज भी.
ईस्ट इंडिया कंपनी पर क़िताब लिखने वाले निक रॉबिंस कहते हैं कि इस कंपनी की आज की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों से तुलना की जा सकती है. ईस्ट इंडिया कंपनी को शुरुआत से ही अपनी फौज रखने की इजाज़त मिली हुई थी.
ब्रिटिश लाइब्रेरी में ईस्ट इंडिया कंपनी के दस्तावेज़ रखे हुए हैं. इनकी ज़िम्मेदारी संभालती हैं मार्गरेट मेकपीस. मार्गरेट बताती हैं कि कंपनी के छोटे-मोटे कामों के लिए भी निदेशक की सिफ़ारिश पर ही नौकरी मिलती थी.
कंपनी में कुल 24 निदेशक थे. कंपनी में जितनी नौकरियां होती थीं, उनसे कई गुना ज़्यादा नौकरी की अर्ज़ियां आती थीं. अगर निदेशक की सिफ़ारिश नहीं है, तो किसी को भी नौकरी मिलना मुमकिन नहीं था.
कई साल मुफ़्त में काम करने के बाद जाकर कंपनी दस पाउंड का मेहनताना देना शुरू करती थी. उन्नीसवीं सदी की शुरुआत होते-होते कंपनी को ख़ुद एहसास हुआ कि सिर्फ़ सिफ़ारिश लाने वालों को नौकरी देने से कंपनी का भला नहीं होगा.
कंपनी ने 1806 में अपने लिए कर्मचारी तैयार करने के लिए ईस्ट इंडिया कॉलेज शुरू किया. हेलबरी में स्थित इस कॉलेज में कंपनी के मुंशियों-बाबुओं को ट्रेनिंग दी जाती थी. यहां पर कर्मचारियों को इतिहास, क़ानून और साहित्य के साथ हिंदुस्तानी, संस्कृत, फारसी और तेलुगु ज़बानों की ट्रेनिंग भी दी जाती थी.
आज फ़ेसबुक और गूगल के शानदार हेडक्वार्टर्स की दुनिया में मिसालें दी जाती हैं. आख़िर कैसा रहा होगा, दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी, ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय?
लंदन में स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय, यक़ीनन आज के फ़ेसबुक और गूगल के हेडक्वार्टर जैसा नहीं था. मगर अपने दौर के हिसाब से ये बेहद शानदार था. लंदन के लीडेनहाल इलाक़े में स्थित कंपनी का मुख्यालय को 1790 में दोबारा बनवाया गया था. इसके दरवाज़े पर इंग्लैंड के राजा किंग जॉर्ज थर्ड की जंग करते हुए मूर्ति लगी थी
1689 में सूरत की फैक्ट्री का दौरा करने वाले अंग्रेज़ पादरी जॉन ओविंगटन ने लिखा था कि वहां पर एक भारतीय, एक अंग्रेज़ और एक पुर्तगाली रसोइया थे. इसका मक़सद था कि सबको अपनी पसंद का खाना मिले. लोगों को मांसाहारी और शाकाहारी, दोनों तरह का खाना मुहैया कराया जाता था.
इतवार को खाने की वेराइटी बढ़ जाती थी. सूखे मेवों जैसे पिस्ते, बादाम और किशमिश पर काफ़ी ज़ोर था. बाहर से आने वाले किसी नामचीन शख़्सीयत की ख़ूब आवभगत होती थी. इस पर काफ़ी पैसे ख़र्च किए जाते थे.
लेकिन आपको ये जान कर बहुत ही खुशी होगी कि जिस कंपनी ने भारत पर सदियों तक राज किया उसे भारत के ही एक व्यापारी ने सन् 2010 में खरीद लिया। जिन का नाम संजीव मेहता है।

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