यह बिल्कुल सत्य है कि लगभग 100 साल के बाद एक नई महामारी इस दुनिया में जन्म लेती है। जिसमें लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है अगर हम पिछले 400 साल का इतिहास देखते हैं तो हमें यह पता लगता है कि हर 100 वर्ष के बाद एक नई बीमारी जन्म लेती है और जिसका कोई इलाज भी नहीं होता।
जब तक उसका इलाज निकाला जाता है तब तक न जाने कितने लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इसके पीछे के कारणों को तो बता पाना तो बहुत ही मुश्किल है। हम इसे धरती पर होने वाले पापों का फल कहे या फिर बढ़ते प्रदूषण का कहर।
परंतु यह सत्य है कि जिस तरह से करोना ने अपने कहर के पैर इस समय दुनिया पर फैलाए हुए हैं उसी तरह से पिछले 400 साल के इतिहास में हर 100 वर्ष के बाद एक न एक महामारी ने इस दुनिया को अपने जाल में घेरा हुआ है।
अगर हम पिछले 400 साल पूर्व फ्रांस शहर की बात करें जहां पर लोग प्लेग जैसी बीमारी की चपेट में आ गए थे और ना जाने कितने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और धीरे-धीरे दुनिया के और देशों में भी फैल गई थी। हमारा देश भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं रहा था।
अब हम बात करते हैं 1820 की। जब इस दुनिया में कोलेरा का कहर फैला था। जिसने अपनी चपेट में न जाने दुनिया के कितने देशों को ले लिया था।
इसके बाद सन् 1920 में स्पैनिश फ्लू नामक बीमारी ने अपने पांव इस दुनिया में फैलाए थे। इस बीमारी से लगभग 5 करोड़ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। यह बीमारी सन् 1918 में अपने पांव इस दुनिया में फैला चुकी थी। परंतु इसका कहर सन् 1920 में देखने को मिला।
अब उसके 100 साल के बाद की बात करें तो वह है सन् 2020 जिसमें कोरोनावायरस ने सन् 2020 की शुरुआत में ही अपना कहर इस दुनिया में दिखा दिया है। इस बीमारी से भी न जाने कितने लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
परंतु अगर थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता बरती जाए तो इस बीमारी से जल्दी ही निजात पाया जा सकता है।
जब तक उसका इलाज निकाला जाता है तब तक न जाने कितने लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इसके पीछे के कारणों को तो बता पाना तो बहुत ही मुश्किल है। हम इसे धरती पर होने वाले पापों का फल कहे या फिर बढ़ते प्रदूषण का कहर।
परंतु यह सत्य है कि जिस तरह से करोना ने अपने कहर के पैर इस समय दुनिया पर फैलाए हुए हैं उसी तरह से पिछले 400 साल के इतिहास में हर 100 वर्ष के बाद एक न एक महामारी ने इस दुनिया को अपने जाल में घेरा हुआ है।
अगर हम पिछले 400 साल पूर्व फ्रांस शहर की बात करें जहां पर लोग प्लेग जैसी बीमारी की चपेट में आ गए थे और ना जाने कितने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और धीरे-धीरे दुनिया के और देशों में भी फैल गई थी। हमारा देश भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं रहा था।
अब हम बात करते हैं 1820 की। जब इस दुनिया में कोलेरा का कहर फैला था। जिसने अपनी चपेट में न जाने दुनिया के कितने देशों को ले लिया था।
इसके बाद सन् 1920 में स्पैनिश फ्लू नामक बीमारी ने अपने पांव इस दुनिया में फैलाए थे। इस बीमारी से लगभग 5 करोड़ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। यह बीमारी सन् 1918 में अपने पांव इस दुनिया में फैला चुकी थी। परंतु इसका कहर सन् 1920 में देखने को मिला।
अब उसके 100 साल के बाद की बात करें तो वह है सन् 2020 जिसमें कोरोनावायरस ने सन् 2020 की शुरुआत में ही अपना कहर इस दुनिया में दिखा दिया है। इस बीमारी से भी न जाने कितने लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
परंतु अगर थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता बरती जाए तो इस बीमारी से जल्दी ही निजात पाया जा सकता है।

0 Comments